ब्रज भाषा की मिठास में प्रेम, अपनापन और भावनाओं की एक अलग ही छाप दिखाई देती है। Braj Bhasha Shayari के जरिए दिल की बात, प्रेम, विरह, दोस्ती, जिंदगी और राधा-कृष्ण के प्रति भावनाओं को बेहद सुंदर अंदाज में व्यक्त किया जा सकता है। ब्रज की लोक-संस्कृति, गाँव की मिट्टी और कृष्ण-राधा की प्रेम परंपरा इसकी शायरी को और खास बनाती है।
इस collection में आपको छोटी Braj Bhasha Shayari, 2 Line Shayari, प्रेम Shayari, राधा-कृष्ण Shayari, दोस्ती और जिंदगी पर Shayari के साथ दिल को छू लेने वाली कई पंक्तियाँ मिलेंगी। इन्हें आप WhatsApp Status, Instagram Caption या अपने खास लोगों के साथ personal sharing के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
राधा-कृष्ण की प्रेम भावना से जुड़ी Braj Bhasha Shayari
राधा के नैना में श्याम बस्यो,
श्याम के मन में राधा, प्रेम भयो अटूट अनोखो।
राधा नाम जपै जो साँझ-सवेरा,
मन में बसै कान्हा, मिटै दुख घनेरा।
बरसाने की गलियन में प्रेम की बयार,
राधा संग कान्हा लागैं सबसे प्यारे।
कान्हा की मुरली जब मधुर तान सुनावै,
राधा को मन प्रेम में डूबत जावै।
राधा बिना श्याम अधूरो लागै,
श्याम बिना राधा को मन ना जागै।
जमुना किनारे बैठी राधा मुस्काय,
दूर खड़ो कान्हा प्रेम की बंसी बजाय।
राधा के प्रेम में ऐसी मिठास,
कान्हा भी भूल गए जग की आस।
श्याम की आँखिन में राधा को प्यार,
राधा के हिय में बस्यो नंदलाल।
प्रेम न पूछै जात-पात न कोई बात,
राधा-कृष्ण प्रेम की सबसे प्यारी मिसाल।
राधा नाम सुनते ही मन हरषाय,
कान्हा की छवि हिय में उतरि आय।
मुरली की धुन और राधा को प्यार,
वृंदावन में गूँजै प्रेम अपार।
राधा के संग श्याम जब मुस्काय,
प्रेम की खुशबू चारों ओर छाय।
हिय में राधा, साँस में श्याम,
इन दोऊ से पावै प्रेम को नाम।
कान्हा की प्रीत बड़ी निराली,
राधा बिन लागै दुनिया खाली।
बरसाने की रज में प्रेम समायो,
राधा-कृष्ण ने जग को प्रेम सिखायो।
राधा की पायल छन-छन बाजै,
सुनि के कान्हा मन ही मन लजै।
श्याम की बंसी जब राधा को बुलावै,
प्रेम में डूबो मन वृंदावन धावै।
राधा-कृष्ण की प्रीत अनोखी,
दुनिया देखै, पर समझै ना कोई।
प्रेम वही जो राधा-श्याम सिखावैं,
बिना कहे भी दिल की बात बतावैं।
राधा के प्रेम में श्याम समायो,
श्याम की प्रीत में राधा खो जायो।
ब्रज की गलियों और वृंदावन की याद दिलाने वाली Shayari
ब्रज की गलियन की धूरि निराली,
जाकी याद आवै तो आँखिन भरि आवैं पानी।
वृंदावन की कुंजन में आज भी प्रेम बसै,
कान्हा की मुरली की धुन मन में रसै।
ब्रज की माटी माथे लगाय लूँ,
मन होय उदास तो वृंदावन आय लूँ।
वृंदावन की गलियन में जो सुकून मिलै,
वो सुख महलन में भी कहाँ मिलै।
जमुना किनारे बैठि के कान्हा को ध्याऊँ,
ब्रज की पुरानी यादन में खो जाऊँ।
बरसाने की गली जब याद आवै,
मन अपने आप राधे-राधे गुनगुनावै।
ब्रज की रज में ऐसी मिठास समाई,
एक बार लग जाए तो छूटै ना भाई।
वृंदावन की हर गली कुछ कहती जाय,
कहीं राधा दिखैं, कहीं श्याम नजर आय।
कदंब की छाँव और जमुना की धार,
ब्रज की याद करावै बारंबार।
ब्रज छोड़ आयो, पर ब्रज मन में रह गयो,
वृंदावन की यादन में हर पल बह गयो।
गलियन में गूँजै राधे-राधे नाम,
हर कोने में बसै मोहन घनश्याम।
वृंदावन की साँझ बड़ी प्यारी लागै,
मन कान्हा की मुरली सुनन को भागै।
ब्रज की गलियन में बचपन सी बात,
हर कदम पे मिलै प्रेम की सौगात।
जमुना की लहरन जब धीरे-धीरे डोलैं,
ब्रज की यादन मन के पट खोलैं।
बरसाने की रज, वृंदावन की गली,
इनकी याद में आँखिन होय भली-भली।
ब्रज की माटी की खुशबू ऐसी छाई,
दूर रह्यो तो हर साँस ने याद दिलाई।
वृंदावन की कुंजन को कौन भुलाय,
जहाँ हर पत्ता कान्हा की कथा सुनाय।
ब्रज की गलियन में फिर घूमन को जी चाहै,
जहाँ हर मोड़ पे राधे-श्याम मिलि जाय।
मथुरा की धरती, वृंदावन को धाम,
मन में बस्यो रहै राधा संग श्याम।
ब्रज की याद जब हिय में उतरि आवै,
मन कहै—चलो फिर वृंदावन, जहाँ सुकून मिलै।
दिल की बात कहने वाली Braj Bhasha Prem Shayari
तोय देखत ही मन मुस्काय जाय,
तू ही बता, तेरो नाम दिल से कैसे मिटाय जाय।
मन में तोय बसाय लियो है चुपचाप,
अब तो तू ही तू है, दिन होय या रात।
तोरी एक मुस्कान पे दिल हारि गयो,
जाने कब तोय से सच्चो प्यारि गयो।
तोरी याद आवै तो मन बेचैन होय,
तू पास रहै तो हर दुख दूर होय।
तोरे बिना सूनी-सूनी लागै डगरिया,
तोय संग ही प्यारी लागै सारी नगरिया।
दिल की बात तोयसे कहन को जी चाहै,
पर तोय देखत ही जुबान चुप होय जाय।
तोरी आँखिन में कुछ ऐसी बात है,
देखूँ तो लागै जैसे पूरी कायनात है।
तू पास रहै तो मन को चैन मिलै,
तू दूर जाय तो नैना बरसन लगैं।
तोरी यादन को कोई हिसाब नाहीं,
दिन होय चाहे रात, तू ही तू है मन माहीं।
तोयसे मिलके समझ आयो प्यार काहे कहत हैं,
जब तू मुस्काय तो दिल फूलन लगत है।
तोरे नाम की धुन मन में बजत रहै,
प्यार की खुशबू साँस-साँस में बसत रहै।
तोरी बातन में ऐसी मिठास घुली,
सुनत-सुनत दिल की दुनिया खिली।
तू मिल गयो तो किस्मत सँवरि गई,
सूनी जिंदगी प्रेम से भरि गई।
तोयसे दूर रहन अब भावै ना मोय,
दिल हर पल बस खोजै तोय।
तोरी खातिर दिल में अरमान हजार,
बस तू रहियो सदा मोरे संग, मेरे प्यार।
आँखिन से कहि दई दिल की सारी बात,
अब समझ ले मोरे मन की बात।
तू हँस दे तो दिन उजियारो होय,
तू रूठ जाय तो मन उदास होय।
तोरे प्रेम में ऐसी डूबी मोरी जान,
हर साँस में बसै तोरो ही नाम।
मन की डोर तोरे हाथ में दे दी,
अब जिंदगी भी तोरे नाम करि दी।
साँचो प्रेम तोयसे ही भयो है मोय,
दिल में बस्यो है बस एक तू ही तोय।
विरह और बिछड़ने का दर्द — Braj Bhasha में
तोरे बिन सूनी लागै मोरी डगरिया,
नैना ढूँढैं तोय, भींजै सारी अँखियाँ।
तू दूर गयो तो मन उदास भयो,
हँसतो चेहरो भी आज उदास भयो।
रात कटै ना, दिन चैन न आवै,
तोरी याद हर पल मोय सतावै।
जाको हाथ पकड़ि के चलनो चाह्यो,
वही बीच राह में मोय छोड़ि गयो।
तोरे बिन ब्रज की गलियन सूनी लागैं,
हर मोड़ पे तेरी याद जगावैं।
नैना बाट निहारत-निहारत थक गए,
पर तू न आयो, हम आस लगाय बैठे रहे।
हिय में तोरी याद बसाय बैठो हूँ,
दर्द छुपाय के मुस्काय बैठो हूँ।
तू बिन सावन भी सूखो-सूखो लागै,
मन की बगिया में फूल न जागै।
तोरी याद की बदरी घिरि आवै,
नैना बरसैं और मन रोय जावै।
बिछड़न को दर्द बड़ा भारी होय,
पास कोई होय फिर भी मन अकेलो होय।
तोरे संग बिताई घड़ी याद आवै,
हर पल मोरे नैना नीर बहावै।
तू गयो पर तोरी याद न गई,
दिल की दुनिया तेरे संग ही गई।
मोरे हिय की पीर कोई समझै ना,
तोरे बिन मन कहीं लगै ना।
जमुना किनारे बैठि तोय याद करूँ,
चुपके-चुपके नैना से नीर भरूँ।
तू लौटि आवै, बस इतनी आस रही,
तेरे बिन जिंदगी अधूरी सी रही।
तेरी राह तकत बीती कितनी रात,
चाँद भी पूछै—काहे रोवै तेरी आँख?
बिछड़ गए तो पता चल्यो प्यार को मोल,
अब हर साँस लगे जैसे मन पे बोझ।
तोरे बिन मुरली की तान भी ना भावै,
हर सुर मोय तेरी याद दिलावै।
मन कहै तू लौटि के फिर आय जा,
सूनी जिंदगी में प्रेम की खुशबू लाय जा।
बिछड़न लिखी थी शायद भाग्य की रेखा में,
पर तू आज भी बस्यो है मोरे हिय की लेखा में।
दोस्ती और यारी पर दिल से निकली Braj Shayari
यार तो वही जो दुख में साथ निभाय,
सुख की घड़ी में तो हर कोई मुस्काय।
मोरो यार दिल के सबसे पास रहै,
चाहे दूर होय, पर हिय में खास रहै।
दोस्ती की डोर बड़ी मजबूत होय,
साँचो यार मिले तो जिंदगी खूब होय।
तेरे संग हँसन में अलगै मजा आवै,
दुख को बादल भी पल में उड़ि जावै।
यारी में ना मतलब, ना कोई हिसाब,
साँचो दोस्त मिलै तो वही सबसे खास।
तू यार मेरो, मैं यार तेरो,
साथ रहैं तो हर मौसम लागै सुनहरो।
दोस्ती में रूठना भी प्यार होय,
मनावन वाला यार मिले तो बात खास होय।
मोरे यार की बात ही निराली,
दुख में पकड़े हाथ, खुशी में दे ताली।
जिंदगी की राह कठिन होय चाहे,
साँचो दोस्त संग होय तो डर काहे।
यार की हँसी सुनि मन खिलि जाय,
उसकी एक बात दिल को सुकून दे जाय।
दोस्ती ऐसी होय जो वक्त न बदलै,
दुनिया बदल जाय पर यार न बदलै।
मोरे यार की याद जब आवै,
बीती हर बात मन में मुस्कावै।
साँचो यार वही जो पीर पहचानै,
बिना कहे मन की बात जानै।
यारी की राह में फूल खिलैं हजार,
जब दिल से निभावै कोई साँचो यार।
तू साथ रहै तो डर काहे को होय,
मोरे यार, तोरे संग हर दुख छोटो होय।
ना धन चाही, ना दौलत अपार,
बस जिंदगी भर मिलत रहै साँचो यार।
ब्रज की माटी जैसी प्यारी यारी,
मन में बसि जाय तो लगे दुनिया सारी।
यार मिले तो कान्हा की कृपा समझूँ,
ऐसी दोस्ती को दिल से अपना समझूँ।
दूर रहिके भी जो पास रहै,
वही साँचो दोस्त कहलाय रहै।
दोस्ती को रिश्ता सबसे न्यारा होय,
साँचो यार मिलै तो जीवन प्यारा होय।
जिंदगी के अनुभवों पर Braj Bhasha Shayari
जिंदगी हर रोज नई बात सिखावै,
गिरि के ही इंसान चलनो सीख पावै।
वक्त कबहूँ एक जैसो रहै ना,
सुख-दुख जीवन में सदा ठहरै ना।
जो बीत गयो, सो बात पुरानी,
आगे की राह बनावै नई कहानी।
जिंदगी की डगर कठिन सही,
हिम्मत रखो तो मंजिल दूर नहीं।
लोगन के रंग समय संग बदलैं,
साँचो अपने वही जो मुश्किल में संभालैं।
ठोकर खाय के जो मुस्काय रहै,
वही जिंदगी को असल मतलब जानै।
हर दर्द कुछ न कुछ सिखाय गयो,
हर आँसू मन को मजबूत बनाय गयो।
वक्त की चाल बड़ी निराली होय,
आज हँसावै, कल आँखिन में नीर होय।
जिंदगी में हार भी जरूरी होय,
तभी जीत की कीमत समझ में आवै।
मन साफ राखो, राह खुद बनि जाय,
साँचो कर्म करोगे तो फल मिलि जाय।
जाको भरोसो खुद पे रहै,
मुश्किल में भी वो आगे बढ़त रहै।
दुनिया की बातन में मत खोय जइयो,
अपने मन की आवाज जरूर सुनइयो।
कुछ लोग राह में मिलि के छूटि जात,
कुछ याद बनिके जीवन भर साथ रहत।
बीते दिनन को सोचि के रोवो ना,
जो मिल्यो है आज, उसको खोवो ना।
समय बड़ा बलवान कहावत सही,
पल में बदलि देत है जिंदगी की दिशा नई।
कम में खुश रहनो सीखि लियो,
जिंदगी को असली सुख पहचानि लियो।
रिश्तन की कीमत वक्त बतावै,
कौन अपनौ है, मुश्किल में समझ आवै।
जिंदगी छोटी है, प्रेम से बितायो,
मन में बैर न राखो, सबको अपनायो।
राह कठिन होय तो कदम रोक्यो ना,
सपनन की खातिर कभी हिम्मत छोड़्यो ना।
जिंदगी एक सफर है, ठहराव नहीं,
हर मोड़ पे सीख है, कोई हार नहीं।
2 Line Braj Bhasha Shayari
तोरी मुस्कान देखत ही मन हरषाय गयो,
जाने कब तू मोरे हिय में समाय गयो।
राधे-राधे नाम जपैं, मन में श्याम बसाय,
ब्रज की माटी छूते ही हर दुख दूरि जाय।
तोरे बिन सूनी लागै मोरी सारी डगरिया,
नैना ढूँढैं तोय, भींजत रहैं अँखियाँ।
साँचो प्रेम वही जो मन में बसि जाय,
दूर रहिके भी हर पल पास नजर आय।
मोरो यार साँचो, सुख-दुख में साथ निभाय,
दुनिया चाहे रूठै, पर हाथ कभी ना छुड़ाय।
जिंदगी ठोकर देय तो हँसि के सहि लियो,
गिरि के ही इंसान चलनो सीख लियो।
ब्रज की गलियन की धूरि बड़ी प्यारी लागै,
एक बार जो आयै, फिर बार-बार मन भागै।
तोरी यादन की बदरी जब घिरि आवै,
सूखे नैना भी चुपके-चुपके बरसावै।
कान्हा की मुरली जब मधुर तान सुनावै,
सुनत ही मन वृंदावन को धावै।
वक्त बदलै तो लोगन के रंग बदलैं,
साँचो अपने वही जो मुश्किल में संभालैं।
तोय देखत ही दिल को चैन मिलै,
तू दूर जाय तो हर पल बेचैनी मिलै।
राधा के प्रेम में श्याम रंगाय गयो,
प्रेम को अर्थ जगत को समझाय गयो।
दुख की रात चाहे कितनी लंबी होय,
भोर की किरण एक दिन जरूर होय।
मोरे हिय में बस्यो है तोरो ही नाम,
साँस-साँस में बसत है मोरो श्याम।
यारी की डोर प्रेम से बाँधी होय,
साँचो दोस्त मिले तो जिंदगी आधी नहीं, पूरी होय।
बीती बातन को मन में राख्यो ना,
आज जो मिल्यो है, उसको गँवायो ना।
तोरे संग बितायो हर पल खास लागै,
तेरी याद आवै तो मन फिर मुस्काय लागै।
ब्रज की माटी माथे लगाय लियो,
मन को सुकून चाहो तो राधे-राधे गा लियो।
जीवन की राह में काँटे मिलैं हजार,
हिम्मत रखै जो, वही पावै साँचो प्यार।
प्रेम की भाषा मन से समझी जाय,
साँचो भाव होय तो बात हिय तक जाय।
छोटी Braj Bhasha Shayari for WhatsApp Status
राधे-राधे नाम, मन को आराम।
ब्रज की माटी, सबसे प्यारी।
हिय में प्रेम, मुख पे मुस्कान।
मोरो मन तोरे संग लागो।
श्याम रंग में रंग गयो मन।
ब्रज की गलियन याद आवैं।
साँचो प्रेम, साँचो सुख।
राधा नाम, प्रेम को धाम।
तोरी याद, मोरी साँस।
यारी होय तो दिल से होय।
मन में श्याम, होठों पे नाम।
ब्रज आयो, मन मुस्कायो।
प्रेम करौ, दिल से करौ।
तोरे बिन मन उदास।
कान्हा की मुरली, मन की धुन।
जिंदगी हँसि के जियौ।
मोरो यार, मोरी शान।
राधे-राधे, हर दुख आधे।
ब्रज की रज, मन को सज।
दिल साफ, जीवन खास।
Instagram Caption के लिए Braj Bhasha Shayari
ब्रज की माटी में अलगै रंग है,
हिय में राधे-श्याम, मुख पे उमंग है।
मोरो अंदाज देसी, पर दिल नवाबी,
ब्रज की बोली लागै सबसे प्यारी।
राधे-राधे कहत ही मन खिलि जाय,
ब्रज की रज माथे लगत ही सुकून आय।
तोरी मुस्कान पे दिल हारि गयो,
जाने कब तू मोरे हिय में समाय गयो।
श्याम रंग में रंग गयो मोरो मन,
अब और कोई रंग भावै ना क्षण।
ब्रज की गलियन में जो मजा आय,
वो दुनिया की दौलत में कहाँ मिल पाय।
मोरी सादगी ही मोरो श्रृंगार,
हिय में प्रेम और मुख पे प्यार।
जो मन में है, वही मुख पे कहत हैं,
ब्रज के छोरा-छोरी दिल से रहत हैं।
जिंदगी छोटी, मुस्कान बड़ी राखौ,
जो मिलै प्रेम से, उसको दिल में राखौ।
तोरे संग हर पल खास लागै,
तेरी एक हँसी पे दिल फिर भागै।
राधा सी प्रीत, श्याम सा रंग,
प्रेम में डूब्यो मोरो अंग-अंग।
ब्रज की बोली, ब्रज को प्यार,
यही तो है मोरो असली श्रृंगार।
नजरन में सपने, हिय में अरमान,
ब्रज की धरती और कान्हा को नाम।
मोरो दिल देसी, मोरी बात निराली,
ब्रज की माटी लागै सबसे प्यारी।
तेरी याद आवै तो मन मुस्काय,
चुपके से दिल तोरो नाम गुनगुनाय।
कान्हा की नगरी, प्रेम को धाम,
हर साँस में बसै राधे-श्याम।
ना दिखावो, ना कोई घमंड,
साँचो रहनो ही मोरो अंदाज।
ब्रज की हवा चली तो मन हरषायो,
राधे-राधे कहिके दिल मुस्कायो।
हिय में प्रेम, आँखिन में चमक,
ब्रज की बोली में अलगै दमक।
मोरो ठाठ ब्रज को, मोरी पहचान ब्रज,
दिल में बस्यो रहै मोरो प्यारा ब्रज।
ब्रज के देसी अंदाज और मिट्टी की खुशबू वाली Shayari
ब्रज की माटी की खुशबू निराली,
मन में बसि जाय तो दुनिया लागै खाली।
देसी अंदाज, हिय में प्यार,
ब्रज की माटी मोरो असली श्रृंगार।
ब्रज की धूरि माथे लगाय लियो,
मन को सुकून और जीवन सजाय लियो।
कच्ची गलियन, पक्को अपनापन,
ब्रज की माटी में बसै साँचो जीवन।
ब्रज की हवा जब हिय से टकराय,
बचपन की हर याद लौटि आय।
ना महलन की चाह, ना धन-दौलत भारी,
ब्रज की माटी लागै मोय सबसे प्यारी।
देसी बोली, देसी मन,
ब्रज की माटी में बसै अपनापन।
खेतन की हरियाली, माटी की महक,
ब्रज की जिंदगी में बसै प्रेम की चमक।
ब्रज की गलियन में जो सुकून मिलै,
वो बड़े शहरन में कहाँ मिलै।
माटी की खुशबू और छाछ को गिलास,
ब्रज को देसी जीवन लागै सबसे खास।
सिर पे पगड़ी, हिय में प्यार,
देसी ब्रज को अलगै अंदाज।
ब्रज की रज में पल्यो है तन,
इसी माटी में बस्यो मोरो मन।
बैलगाड़ी की चाल और खेतन की राह,
ब्रज की जिंदगी में अलगै चाह।
सुबह-सुबह मंदिर की घंटी बाजै,
ब्रज की हवा मन को खूब सुहावै।
माटी से जुड़्यो रहनो मोरो मान,
ब्रज की धरती ही मोरी पहचान।
देसी हँसी और मीठी बोली,
ब्रज की माटी सबसे अनमोल।
चूल्हे की रोटी, मट्ठे को स्वाद,
ब्रज की जिंदगी की यही तो बात।
शहर की चमक चाहे जितनी होय,
ब्रज की माटी जैसी खुशबू कहीं ना होय।
मोरी पहचान ना कपड़ा ना श्रृंगार,
ब्रज की माटी और देसी संस्कार।
जहाँ माटी में अपनापन महकाय,
वही ब्रज मोय बार-बार बुलाय।
कृष्ण भक्ति और कान्हा के लिए Braj Bhasha Shayari
कान्हा तेरे नाम में ऐसी मिठास,
जपत ही मिटि जाय मन की हर प्यास।
मोरे हिय में बस्यो है नंदलाल,
तेरे नाम बिना सब लागै बेहाल।
राधे-राधे जपत रहूँ दिन-रात,
श्याम मिलैं तो बनि जाय हर बात।
कान्हा की मुरली जब मन में बाजै,
दुख की बदरी पल में उड़ि जाय।
मोय ना चाही धन-दौलत अपार,
बस मिल जाय कान्हा को प्यार।
नंद के लाल, तू मोरो सहारा,
तेरे नाम से उजियारो जग सारा।
जमुना तीर बैठि तोय ध्याऊँ,
मन की सारी पीर तोय सुनाऊँ।
मोहन तेरी छवि मन में बसि गई,
दुनिया की सारी चाहत मिटि गई।
तेरी भक्ति में मन रमि गयो,
जीवन को हर दुख कमि गयो।
कान्हा तू मोरे संग रहियो,
चाहे सुख देयो, चाहे दुख सहियो।
मोरे नैना तरसैं तोरी झलकन को,
मन तरसै बस तेरे चरणन को।
तेरी मुरली की धुन ऐसी प्यारी,
सुनत ही भूलूँ दुनिया सारी।
श्याम नाम को दीप जलायो,
मन मंदिर में प्रेम सजायो।
कान्हा के रंग में रंगी मोरी आत्मा,
अब और कोई रंग लागै ना प्यारा।
तू ही मोरो जीवन, तू ही आधार,
नंदलाल तू ही मोरो सच्चो प्यार।
तेरे चरणन की धूरि मिलि जाय,
मोरो जीवन धन्य होय जाय।
जब-जब मन घबरायो मोरो,
श्याम नाम ने थाम लियो मोय।
वृंदावन की रज माथे लगाय,
मन हर पल बस कान्हा को ध्याय।
कान्हा की भक्ति में जो सुख पायो,
वो सुख जग में कहीं न पायो।
मोहन मोरे हिय में सदा बसियो,
अंतिम साँस तक तोरो नाम रसियो।
ब्रज के त्योहारों और खास मौकों पर Shayari
होरी खेलैं आज ब्रज में नंदलाल,
रंग में रंग गयो राधा संग ग्वाल-बाल।
बरसाने की लठमार होरी निराली,
राधे संग श्याम की प्रीत मतवाली।
जन्माष्टमी आयी, खुशियाँ छायँ,
नंद के घर कान्हा जन्म लियायँ।
झूला पड़े वृंदावन की डारी,
राधा संग झूलैं बिहारी।
सावन की फुहार और हरियाली छाय,
राधा-श्याम की याद मन में आय।
दीप जलैं घर-घर की चौखट पे आज,
ब्रज में चमकै प्रेम और भक्ति को राज।
गोवर्धन पूजा को दिन आयो प्यारा,
गिरिराज धरन को याद करै ब्रज सारा।
राधाष्टमी के पावन दिन आयो,
बरसाने में प्रेम को रंग छायो।
होरी के रंग में ब्रज रंग गयो,
राधा-श्याम को प्रेम हर मन में बस गयो।
कार्तिक की साँझ बड़ी मनभावन,
दीप जलैं और गूँजै राधे-राधे पावन।
ब्रज की गलियन में फूल बरसैं,
त्योहारन पे सब मिलि हँसैं।
कान्हा के जन्म की खुशियाँ अपार,
नंद भवन में बाजैं मंगलाचार।
बरसाने की रज आज और सुहानी,
राधा नाम से महकै हर कहानी।
झूलन के दिन मन हरषाय,
राधा-श्याम संग प्रेम बरसाय।
गोवर्धन की पूजा करैं सब मिलि,
भक्ति से भरि जाय ब्रज की गली।
होरी आई तो रंग उड़ायो,
श्याम ने राधा को रंग लगायो।
त्योहार को रंग तभी सुहावै,
जब अपनों संग हँसी-खुशी मनावै।
ब्रज के मेले, ब्रज की बहार,
हर त्योहार लागै मन को प्यार।
मंगल दिन होय, मन में प्रेम जगायो,
राधे-श्याम को नाम हिय में बसायो।
ब्रज के त्योहारन की बात निराली,
हर मौके पे प्रेम की खुशबू मतवाली।
ब्रज की प्रसिद्ध लोकभावना और कहावतों से प्रेरित Shayari
जैसी करनी वैसी भरनी, ब्रज में बात पुरानी,
करमन को फल मिलै, चाहे होय रात सुहानी।
मन साफ होय तो बात में मिठास रहै,
ब्रज की बोली में अपनापन खास रहै।
जहाँ प्रेम की डोर बंधी होय,
वहाँ छोटो घर भी महल समान होय।
परिश्रम करै जो खेतन में दिन-रात,
धरती मैया देय उसको सुख की सौगात।
मीठी बोली बोलि के दिल जीत लियो,
कटु बचन बोलि के अपनौ भी खो दियो।
दुख में जो साथ निभाय रहै,
वही साँचो अपनौ कहलाय रहै।
समय की चाल को कौन रोक पायो,
आज जो हँस्यो, कल नीर बहायो।
ब्रज की माटी सिखावै यही बात,
मेहनत करै तो खिलै जीवन की सौगात।
थोरो होय पर प्रेम से खायो,
सूखी रोटी में भी स्वाद पायो।
बड़न को मान और छोटन को प्यार,
यही ब्रज की रीति, यही साँचो संस्कार।
मन में मैल राखि के का पायो,
प्रेम बाँटोगे तो प्रेम ही पायो।
गाँव की चौपाल और अपनों को साथ,
ब्रज की जिंदगी की यही खास बात।
एकता में बल होय, सब मिलि रहियो,
दुख की घड़ी में एक-दूजे को थामि लियो।
बोल मीठे रखियो, रिश्ते बचि जावैं,
कड़वे बोल मन में काँटा बनि जावैं।
जो दूसरन के काम आवै,
वही जीवन को साँचो सुख पावै।
माटी से जुड़्यो रहै जो इंसान,
वही समझै धरती को असली मान।
लोभ की गठरी भारी होय,
संतोष रखो तो मन हलको होय।
समय बड़ो बलवान कहाय,
पल में राजा, पल में रंक बनाय।
प्रेम की भाषा सबको भावै,
साँचो अपनापन दूरियाँ मिटावै।
ब्रज की लोकबोली यही समझावै,
हँसत रहो और सबको हँसावै।
Conclusion
Braj Bhasha Shayari सिर्फ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि ब्रज की मिट्टी, प्रेम, अपनापन और भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति है। राधा-कृष्ण के प्रेम से लेकर दोस्ती, विरह, जिंदगी और देसी रिश्तों तक, ब्रज भाषा हर एहसास को अपने खास अंदाज में दिल तक पहुँचाती है।
उम्मीद है कि इस collection में दी गई Braj Bhasha Shayari, 2 Line Shayari और प्रेम, कृष्ण-राधा, दोस्ती व जिंदगी की शायरी आपको पसंद आई होगी। अपनी पसंद की Shayari को WhatsApp Status, Instagram Caption या अपने किसी खास व्यक्ति के साथ जरूर साझा करें और ब्रज की मीठी बोली से जुड़े इस खूबसूरत एहसास को आगे बढ़ाएँ।
FAQs
Braj Bhasha Shayari क्या होती है?
Braj Bhasha Shayari ब्रज भाषा में लिखी गई भावपूर्ण शायरी होती है, जिसमें प्रेम, विरह, दोस्ती, जिंदगी, भक्ति और राधा-कृष्ण जैसे विषयों को सुंदर अंदाज में व्यक्त किया जाता है।
Braj Bhasha में प्रेम Shayari क्यों खास होती है?
ब्रज भाषा के शब्दों में मिठास और अपनापन होता है, इसलिए प्रेम और विरह जैसे भाव इसमें बहुत सहज और दिल छू लेने वाले लगते हैं।
क्या Braj Bhasha और Hindi अलग भाषाएँ हैं?
हाँ, Braj Bhasha और आधुनिक मानक हिंदी अलग भाषाई रूप हैं। Braj Bhasha पश्चिमी हिंदी की प्रमुख बोलियों में गिनी जाती है और इसका साहित्यिक इतिहास बहुत समृद्ध है।
Braj Bhasha Shayari में Radha-Krishna का इतना महत्व क्यों है?
ब्रज क्षेत्र का संबंध कृष्ण की लीलाओं और राधा-कृष्ण की प्रेम परंपरा से गहराई से जुड़ा है। इसलिए कृष्ण-भक्ति और राधा-कृष्ण प्रेम Braj Bhasha की कविता और शायरी में प्रमुख भाव रहे हैं।
2 Line Braj Bhasha Shayari कहाँ इस्तेमाल कर सकते हैं?
2 Line Braj Bhasha Shayari को WhatsApp Status, Instagram Caption, Facebook Post या किसी खास व्यक्ति को संदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्या Braj Bhasha Shayari WhatsApp Status के लिए अच्छी है?
बिल्कुल। छोटी और भावपूर्ण Braj Bhasha Shayari WhatsApp Status के लिए खास तौर पर अच्छी रहती है, क्योंकि कम शब्दों में भी भावनाएँ व्यक्त हो जाती हैं।
Instagram Caption के लिए Braj Bhasha Shayari कैसे चुनें?
अपनी तस्वीर या पोस्ट के भाव के अनुसार Shayari चुनें। प्रेम या Couple Post के लिए प्रेम Shayari, Krishna से जुड़ी तस्वीर के लिए कृष्ण Shayari और देसी तस्वीरों के लिए Braj की मिट्टी व गाँव से जुड़ी Shayari अच्छी रहेगी।
Braj Bhasha मुख्य रूप से कहाँ बोली जाती है?
Braj Bhasha का पारंपरिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र, विशेषकर मथुरा, वृंदावन, आगरा और आसपास के इलाकों से जुड़ा हुआ है। इसके बोलने वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश और अन्य आसपास के क्षेत्रों में भी मिलते हैं।
क्या Braj Bhasha Shayari सिर्फ प्रेम के बारे में होती है?
नहीं। इसमें प्रेम के अलावा राधा-कृष्ण भक्ति, विरह, दोस्ती, परिवार, गाँव, मिट्टी, जिंदगी और मानवीय रिश्तों जैसे कई विषयों पर Shayari लिखी जाती है।
Braj Bhasha Shayari को Hindi Meaning के साथ पढ़ना क्यों उपयोगी है?
Hindi Meaning के साथ पढ़ने से Braj Bhasha के शब्दों और भावों को आसानी से समझा जा सकता है, खासकर उन पाठकों के लिए जो Braj भाषा से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।