कुछ दोस्त ऐसे होते हैं जो हालचाल कम और उधार ज्यादा मांगते हैं। सैलरी खाते में आते ही इनका मैसेज आ जाता है, “भाई, थोड़े पैसे मिलेंगे क्या?” मजेदार बात तो ये है कि उधार लेते वक्त बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन वापस करने के समय गायब हो जाते हैं। कुछ रिश्तेदार भी पैसे लेकर ऐसे भूल जाते हैं जैसे कभी उधार लिया ही नहीं। कई बार पैसों के चक्कर में अच्छी-खासी दोस्ती भी खराब हो जाती है। ऐसे लोगों के लिए हम लाए हैं Udhar Paise Mangne Wale Shayari, जिनसे आप मजेदार अंदाज में ताना भी मार सकते हैं और अपनी बात भी कह सकते हैं।
Udhar Paise Mangne Wale Shayari

जब भी मिलते हैं, नया बहाना बनाते हैं,
कुछ लोग दोस्ती नहीं, बस उधार मांगने आते हैं।
जेब में पैसे हों तो सबको याद आते हैं,
खाली जेब होते ही अपने भी भूल जाते हैं।
महीने की पहली तारीख सबको प्यारी लगती है,
मेरी सैलरी आते ही उधार की बीमारी लगती है।
हर बार कहते हो बस आखिरी बार मांग रहा हूं,
तुम्हारी इसी बात से मैं कई साल से परेशान हूं।
दोस्ती अपनी जगह है, पैसों का हिसाब अलग,
हर मुलाकात में उधार मांगना कोई बात नहीं ढंग की।
चेहरे पर मुस्कान और जुबान पर प्यार रखते हैं,
कुछ दोस्त हमेशा उधार की फरियाद रखते हैं।
कभी हजार तो कभी पांच सौ मांग लेते हो,
भाई तुम दोस्त हो या चलता-फिरता एटीएम समझ लेते हो।
अपनी जरूरतों को हमने भी दबाया है,
तुम्हें उधार देने के लिए खुद को समझाया है।
पैसे मांगते वक्त रिश्ते याद आते हैं,
लौटाने की बारी आए तो बहाने बन जाते हैं।
हर किसी को अपनी मजबूरी सुनाते हो,
उधार लेकर फिर नजर क्यों चुराते हो।
मेरा दिल बड़ा है, मगर जेब छोटी है,
हर बार उधार देना भी कोई नौकरी थोड़ी है।
बातें तुम्हारी मीठी और इरादे कमाल हैं,
उधार मांगने में भाई तुम्हारा अलग ही हाल है।
जब देखो तब पैसों की बात करते हो,
कभी हालचाल भी पूछ लिया करो, क्या हर बार उधार ही मांगते हो।
पहले दोस्ती का वास्ता देकर मनाते हो,
फिर पैसे लेकर महीनों तक गायब हो जाते हो।
तुम्हारी जरूरत पर हमने अपना हाथ बढ़ाया था,
क्या पता था तुमने हमें बैंक समझकर अपनाया था।
ना बैंक हूं, ना कोई खजाना रखता हूं,
मैं भी अपनी कमाई से घर चलाता हूं।
उधार मांगने वालों का अंदाज निराला है,
हर महीने उनकी मजबूरी का नया हवाला है।
जब खुद के पैसे चाहिए तो सौ सवाल पूछते हो,
दूसरों के पैसे लेते वक्त सारे हिसाब भूलते हो।
दोस्ती निभाने के लिए दिल चाहिए जनाब,
हर बार उधार मांगना नहीं होता प्यार का जवाब।
अब उधार के नाम पर मुस्कुराना छोड़ दिया,
जो लौटाते नहीं पैसे, उन्हें देना छोड़ दिया।
उधार मांगने वालों की बोलती बंद शायरी

उधार मांगने से पहले अपना हिसाब देख लिया करो,
दूसरों की जेब नहीं, अपनी औकात में जी लिया करो।
हर बार मजबूरी का नया किस्सा सुनाते हो,
खुद कमाने के बजाय दूसरों से क्यों मांगते हो।
मेरी जेब को अपनी जागीर समझना छोड़ दो,
दोस्ती के नाम पर उधार मांगना छोड़ दो।
पैसे चाहिए तो मेहनत से कमाना सीखो,
हर बार दूसरों के आगे हाथ फैलाना छोड़ो।
तेरी हर परेशानी का इलाज मेरी जेब नहीं,
मैं तेरा दोस्त हूं भाई, कोई बैंक नहीं।
उधार मांगने का शौक बड़ा निराला है,
काम की बात आते ही तेरा फोन बंद रहने वाला है।
मेरे पैसों पर अब अपना हक जताना बंद कर,
दोस्ती है तो दोस्त बन, कर्जदार बनना बंद कर।
हर महीने नया बहाना लेकर आते हो,
शर्म नहीं आती, फिर से पैसे मांग जाते हो।
जिस दिन पैसे देना बंद कर दिया मैंने,
उस दिन दोस्ती का असली चेहरा देख लिया मैंने।
अपनी जरूरतों का बोझ खुद उठाना सीख,
हर बार मेरे सामने मजबूरी गिनाना छोड़।
मेहनत मेरी और खर्चे तुम्हारे क्यों हों,
मेरे कमाए पैसे तुम्हारे सहारे क्यों हों।
जितनी तेजी से उधार मांगने आते हो,
काश उतनी ही जल्दी पैसे लौटाते हो।
तेरी मीठी बातों का अब असर नहीं होता,
उधार के नाम पर मेरा दिल नहीं पिघलता।
मांगने की आदत को मजबूरी मत बताया कर,
हर बार दोस्ती की कसम देकर पैसे मत मांगा कर।
ना कोई खजाना है, ना नोटों की बरसात है,
मेरी भी जरूरतें हैं, बस इतनी सी बात है।
जब तक पैसे मिलते रहे, दोस्ती निभाते रहे,
जिस दिन मना किया, असली रंग दिखाते रहे।
अपने शौक पूरे करने को उधार मांगते हो,
फिर खुद को बेचारा बताकर एहसान जताते हो।
उधार मांगकर रौब दिखाना अच्छी बात नहीं,
दूसरों के पैसों पर शान दिखाना औकात नहीं।
अब तेरे बहानों पर यकीन नहीं करेंगे,
दोस्ती रखेंगे मगर उधार नहीं देंगे।
सुन भाई, अब साफ-साफ जवाब मिलेगा,
उधार के नाम पर सिर्फ इनकार मिलेगा।
बार-बार पैसे मांगने वालों पर मजेदार शायरी

तेरा फोन आते ही दिल घबराता है,
लगता है फिर कोई उधार मांगने आता है। 😂
ना हाल पूछता, ना त्योहार की बधाई देता है,
मेरा दोस्त सिर्फ पैसों की जरूरत पर दिखाई देता है।
हर महीने तेरी मजबूरी नई होती है,
भाई, तेरी उधार की कहानी कभी खत्म क्यों नहीं होती है।
सैलरी आते ही तू ऐसे याद करता है,
जैसे मेरा बैंक अकाउंट तेरा इंतजार करता है।
तेरी दोस्ती का अंदाज बड़ा कमाल है,
हर मुलाकात में बस पैसों का सवाल है।
चाय पिलाने में तेरी जेब कांप जाती है,
उधार मांगने में तेरी जुबान फर्राटे भर जाती है।
तू दोस्त कम और नोटिफिकेशन ज्यादा लगता है,
हर मैसेज में उधार का नया आवेदन लगता है।
मेरी जेब में पैसे हों तो तू पास आता है,
खाली जेब सुनते ही नेटवर्क से बाहर जाता है।
इतनी बार तो अलार्म भी नहीं बजता सुबह,
जितनी बार तू पैसे मांगता है भाई हर दफा।
तेरी उधार मांगने की रफ्तार बड़ी तेज है,
लगता है मेरे नाम पर ही तेरा पूरा बजट सेट है।
तेरा हर मैसेज पढ़कर डर लगता है,
हाय-हेलो के बाद सीधा उधार निकलता है।
कभी पांच सौ, कभी हजार की फरमाइश है,
भाई तेरी दोस्ती नहीं, कोई मासिक किश्तों की ख्वाहिश है।
बैंक वाले भी इतना लोन नहीं बांटते,
जितना तू हर हफ्ते मुझसे उधार मांगते।
तू जब भी कहता है एक जरूरी बात है,
समझ जाता हूं फिर मेरी जेब पर घात है।
तेरी मजबूरी सुनकर आंखें भर आती हैं,
मगर तेरी ऑनलाइन शॉपिंग की तस्वीरें हंसाती हैं।
मेरी सैलरी पर तेरा इतना ध्यान रहता है,
जितना मेरे बॉस को भी कहां याद रहता है।
दोस्ती में प्यार कम, उधार का हिसाब ज्यादा है,
तेरी हर मुलाकात का बस यही इरादा है।
अगर उधार मांगना कोई सरकारी नौकरी होती,
तो भाई तेरी पोस्टिंग सीधे अफसर की होती।
इतनी बार तो घरवाले भी याद नहीं करते,
जितनी बार तुम पैसे मांगने के लिए फोन करते।
अब तेरे नंबर को बैंक के नाम से सेव कर दिया,
हर बार पैसे मांगने पर फोन साइलेंट कर दिया। 🤣
उधार लेकर वापस न देने वालों पर शायरी

मुसीबत में तेरी मदद करके एहसान नहीं जताया था,
लेकिन तूने पैसे लेकर लौटाने का नाम ही भुलाया था।
उधार लेते वक्त भाई-भाई कहते थे,
पैसे लौटाने की बारी आई तो अनजान बन गए।
पैसे मांगते वक्त तेरी मजबूरी समझी थी,
क्या पता था तेरी नीयत ही इतनी सस्ती थी।
उधार लेकर भूल जाना तेरी आदत बन गई,
तेरी इसी हरकत से हमारी दोस्ती खत्म हो गई।
जब जरूरत थी तो रोज फोन मिलाते थे,
अब पैसे वापस मांगूं तो फोन तक नहीं उठाते थे।
मेहनत की कमाई तुझे भरोसे पर दी थी,
तूने पैसे के साथ हमारी दोस्ती भी छीन ली थी।
उधार लेने वाले की याददाश्त कमाल होती है,
लेते वक्त सब याद, लौटाते वक्त भूलने की बीमारी होती है।
कर्ज लेते समय आंखों में आंसू लाते हो,
वापस मांगने पर हमें ही बुरा बताते हो।
जिसे अपना समझकर पैसे उधार दिए थे,
उसी ने लौटाने के नाम पर सौ बहाने किए थे।
पैसे मेरे थे और जरूरत तुम्हारी थी,
अब वापस मांगूं तो गलती हमारी थी।
उधार लेकर अमीरी का दिखावा करते हो,
दूसरों की कमाई से अपने शौक पूरे करते हो।
जब उधार चाहिए था तो वक्त निकाल लेते थे,
अब लौटाने की बारी आई तो व्यस्त हो जाते हो।
ना पैसे लौटाए, ना कोई जवाब दिया,
दोस्ती के नाम पर बस धोखा बेहिसाब दिया।
तेरी मजबूरी पर भरोसा करके हाथ बढ़ाया था,
तूने उसी भरोसे को बाजार में बेच खाया था।
पैसे वापस मांगना कोई गुनाह नहीं होता,
उधार लेकर मुकर जाना कोई मजाक नहीं होता।
उधार लेते वक्त कहते थे कल दे दूंगा,
आज साल बीत गया, फिर भी कहते हो कल दे दूंगा।
पैसे लेने में तुम्हें जरा शर्म नहीं आई,
लौटाने की बात पर तुम्हें दोस्ती याद आई।
जिस दिन उधार दिया था, बड़ा प्यार दिखाया था,
जिस दिन वापस मांगा, तूने अपना असली रंग दिखाया था।
रकम छोटी थी, मगर भरोसा बहुत बड़ा था,
पैसे नहीं लौटाए, दुख इस बात का ज्यादा था।
अब ना बहानों पर यकीन करेंगे, ना झूठी बातों में आएंगे,
जो उधार लेकर लौटाते नहीं, उनसे दूरी बनाएंगे।
उधार मांगने वाले दोस्तों पर शायरी

दोस्ती का रिश्ता बड़ा प्यारा होता है,
लेकिन कुछ दोस्तों को बस उधार ही प्यारा होता है।
जब भी दोस्त का फोन आता है,
दिल कहता है फिर कोई उधार मांगने वाला आता है।
दोस्ती में प्यार और विश्वास होना चाहिए,
हर मुलाकात में उधार का हिसाब नहीं होना चाहिए।
जब जेब में पैसे होते हैं तो दोस्त याद करते हैं,
जब पैसे खत्म होते हैं तो वही दोस्त नजरअंदाज करते हैं।
मेरा दोस्त भी बड़ा होशियार निकला,
चाय पीने आया और हजार रुपये लेकर निकला।
दोस्ती निभाने का उसका अंदाज निराला है,
हर महीने उधार मांगने का नया बहाना है।
तेरी दोस्ती पर कभी शक नहीं किया था,
पर तूने हर बार मिलकर उधार ही लिया था।
दोस्त कहता है बस पांच सौ की जरूरत है,
मैंने कहा भाई, तेरी यही तो रोज की आदत है।
तेरे मैसेज में जब भी भाई लिखा आता है,
समझ जाता हूं मेरा बैंक बैलेंस खतरे में आता है।
दोस्ती के नाम पर कितने बहाने बनाता है,
हर बार पैसे लेकर अगली तारीख बताता है।
ना जन्मदिन याद, ना कोई त्योहार याद है,
मेरे दोस्त को बस मेरी सैलरी की तारीख याद है।
दोस्तों की महफिल में हंसी-मजाक चलता है,
पर मेरा दोस्त हर बार उधार का जिक्र करता है।
तेरी दोस्ती में बड़ा नुकसान उठाया है,
तूने हंसी कम और उधार ज्यादा पाया है।
एक दोस्त ऐसा भी जिंदगी में आया है,
जिसने मुझे इंसान नहीं, एटीएम समझ पाया है।
यारी निभाने में हमने कभी कमी नहीं रखी,
पर तूने उधार मांगने में कोई कसर नहीं रखी।
दोस्ती के लिए जान देने की बातें करता है,
मगर सौ रुपये लौटाने में भी बहाने करता है।
जब भी कहता है भाई एक काम था,
समझ जाता हूं फिर पैसों का इंतजाम था।
दोस्त तेरी जरूरतों का कोई अंत नहीं है,
मेरी जेब में भी नोट छापने का प्लांट नहीं है।
सच्चा दोस्त मुश्किल में साथ निभाता है,
उधार के लिए नहीं, बिना मतलब भी याद आता है।
दोस्ती रहेगी अपनी हमेशा बरकरार,
लेकिन भाई अब नहीं मिलेगा हर बार उधार।
उधार मांगने वाले दोस्तों पर शायरी

दोस्ती का रिश्ता बड़ा प्यारा होता है,
लेकिन कुछ दोस्तों को बस उधार ही प्यारा होता है।
जब भी दोस्त का फोन आता है,
दिल कहता है फिर कोई उधार मांगने वाला आता है।
दोस्ती में प्यार और विश्वास होना चाहिए,
हर मुलाकात में उधार का हिसाब नहीं होना चाहिए।
जब जेब में पैसे होते हैं तो दोस्त याद करते हैं,
जब पैसे खत्म होते हैं तो वही दोस्त नजरअंदाज करते हैं।
मेरा दोस्त भी बड़ा होशियार निकला,
चाय पीने आया और हजार रुपये लेकर निकला।
दोस्ती निभाने का उसका अंदाज निराला है,
हर महीने उधार मांगने का नया बहाना है।
तेरी दोस्ती पर कभी शक नहीं किया था,
पर तूने हर बार मिलकर उधार ही लिया था।
दोस्त कहता है बस पांच सौ की जरूरत है,
मैंने कहा भाई, तेरी यही तो रोज की आदत है।
तेरे मैसेज में जब भी भाई लिखा आता है,
समझ जाता हूं मेरा बैंक बैलेंस खतरे में आता है।
दोस्ती के नाम पर कितने बहाने बनाता है,
हर बार पैसे लेकर अगली तारीख बताता है।
ना जन्मदिन याद, ना कोई त्योहार याद है,
मेरे दोस्त को बस मेरी सैलरी की तारीख याद है।
दोस्तों की महफिल में हंसी-मजाक चलता है,
पर मेरा दोस्त हर बार उधार का जिक्र करता है।
तेरी दोस्ती में बड़ा नुकसान उठाया है,
तूने हंसी कम और उधार ज्यादा पाया है।
एक दोस्त ऐसा भी जिंदगी में आया है,
जिसने मुझे इंसान नहीं, एटीएम समझ पाया है।
यारी निभाने में हमने कभी कमी नहीं रखी,
पर तूने उधार मांगने में कोई कसर नहीं रखी।
दोस्ती के लिए जान देने की बातें करता है,
मगर सौ रुपये लौटाने में भी बहाने करता है।
जब भी कहता है भाई एक काम था,
समझ जाता हूं फिर पैसों का इंतजाम था।
दोस्त तेरी जरूरतों का कोई अंत नहीं है,
मेरी जेब में भी नोट छापने का प्लांट नहीं है।
सच्चा दोस्त मुश्किल में साथ निभाता है,
उधार के लिए नहीं, बिना मतलब भी याद आता है।
दोस्ती रहेगी अपनी हमेशा बरकरार,
लेकिन भाई अब नहीं मिलेगा हर बार उधार।
उधार मांगने वालों के लिए एटीट्यूड शायरी

मेरी कमाई पर नजर रखना छोड़ दे,
अपने शौक के लिए दूसरों से मांगना छोड़ दे।
मेरी जेब पर हक जताने की जरूरत नहीं,
दोस्ती अपनी जगह है, उधार देने की मजबूरी नहीं।
हम दिल के अमीर हैं, कोई बैंक नहीं,
हर किसी को उधार दें, इतने भी नेक नहीं।
अपनी मेहनत से अपना रुतबा बनाया है,
तेरे जैसे मांगने वालों के लिए नहीं कमाया है।
पैसे मेरे हैं, फैसला भी मेरा होगा,
उधार दूं या ना दूं, ये हक भी मेरा होगा।
मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी मत समझ,
हर बार पैसे मिलेंगे, ऐसी गलतफहमी मत रख।
तेरी जरूरतों का ठेका नहीं लिया हमने,
अपने दम पर जीना सीखा है हमने।
हमारी शराफत का फायदा उठाना बंद कर,
दोस्ती की आड़ में उधार मांगना बंद कर।
ना किसी से उधार लेते हैं, ना एहसान रखते हैं,
हम अपनी मेहनत पर जीने का अभिमान रखते हैं।
बात इज्जत की हो तो दिल खोलकर साथ देंगे,
लेकिन हर बार उधार मांगोगे तो साफ इनकार करेंगे।
अपना हिसाब खुद रखना सीखा है,
दूसरों की जेब से दूर रहना सीखा है।
मेरे पैसों पर तेरी हुकूमत नहीं चलेगी,
अब तेरी उधार वाली चालाकी नहीं चलेगी।
हमारी दोस्ती को पैसों से मत तोल,
उधार चाहिए तो पहले पुराना हिसाब खोल।
हम अपने उसूलों पर जिंदगी बिताते हैं,
जो उधार लेकर मुकर जाएं, उनसे दूरी बनाते हैं।
मेरे इनकार पर नाराज होने का हक नहीं,
मेरी कमाई पर तेरा कोई हक नहीं।
जब तक दिया उधार, तब तक अच्छे थे हम,
जब मना किया, तो अचानक बुरे हो गए हम।
रुतबा पैसों से नहीं, किरदार से बनता है,
जो उधार लौटाए, वही भरोसे के लायक बनता है।
तेरे बहानों से अब दिल नहीं पिघलेगा,
इस बार उधार के बदले सिर्फ जवाब मिलेगा।
हमारी पहचान किसी के काम आने से है,
हर बार अपनी जेब खाली करवाने से नहीं।
ना तेरे तानों से डरेंगे, ना बातों में आएंगे,
अपनी मेहनत की कमाई अब सोच-समझकर लगाएंगे।
उधार मांगने वाले रिश्तेदारों पर शायरी

रिश्तेदारी निभाने का अजीब दस्तूर है,
हर मुलाकात में उधार मांगना जरूर है।
जब भी रिश्तेदार घर आते हैं,
चाय कम और पैसों की बात ज्यादा चलाते हैं।
रिश्तों में प्यार कम, पैसों का हिसाब ज्यादा है,
कुछ रिश्तेदारों का उधार मांगना ही इरादा है।
शादी में मिलने का वक्त नहीं मिलता,
मगर उधार मांगने में कोई बहाना नहीं चलता।
रिश्तेदार कहते हैं हम तो अपने हैं,
फिर पैसे लेकर क्यों भूल जाते सपने हैं।
जब जेब भरी हो तो रिश्तेदार आते हैं,
खाली जेब सुनकर रास्ता बदल जाते हैं।
रिश्तेदारी के नाम पर एहसान जताते हैं,
पैसे चाहिए हों तो अपनापन दिखाते हैं।
कभी मामा, कभी चाचा का फोन आता है,
हालचाल के बाद उधार का सवाल आता है।
रिश्तेदारों की मोहब्बत भी कमाल होती है,
पैसे मांगने पर ही उनकी आवाज में मिठास होती है।
त्योहार पर मिठाई लेकर घर आते हैं,
जाते-जाते हजारों का उधार मांग जाते हैं।
रिश्तेदारी निभाओ तो जेब खाली हो जाती है,
उधार से मना करो तो नाराजगी शुरू हो जाती है।
रिश्तेदार कहते हैं बस एक महीने की बात है,
साल गुजर जाता है, फिर भी वही हालात हैं।
पैसे देते वक्त सब अपने बन जाते हैं,
वापस मांगने पर रिश्तों के वास्ते सुनाते हैं।
हमने रिश्तों की खातिर अपना हाथ बढ़ाया,
उन्होंने उधार लेकर फिर कभी मुंह नहीं दिखाया।
कुछ रिश्तेदार इतने समझदार होते हैं,
अपने खर्चे छोड़कर हमारे पैसों के हकदार होते हैं।
जब जरूरत होती है तो बेटा-बेटा कहते हैं,
पैसे लौटाने की बारी आए तो चुप रहते हैं।
रिश्तेदारों का भी अजीब कारोबार है,
मिलने आते कम हैं, मांगते उधार हैं।
ना रिश्ते तोड़ना चाहते हैं, ना दिल दुखाना चाहते हैं,
बस हर बार उधार देकर खुद को नहीं फंसाना चाहते हैं।
रिश्तेदार हो इसलिए इज्जत बरकरार है,
लेकिन मेरी जेब पर तुम्हारा नहीं अधिकार है।
रिश्ते दिल से निभाएंगे, प्यार भी बनाए रखेंगे,
मगर अब उधार देने से पहले पुराना हिसाब देखेंगे।
पैसे मांगने वालों को करारा जवाब शायरी

मेरी जेब को अपनी जागीर मत समझ,
हर बार पैसे दूंगा, इतना अमीर मत समझ।
पैसे मेरे हैं, कोई खैरात नहीं,
हर बार उधार देना मेरी औकात नहीं, बात उसूलों की है।
मांगने से पहले पुराना हिसाब चुका देना,
फिर नए उधार की बात जुबान पर लाना।
दोस्ती का मतलब हर बार पैसा देना नहीं,
और मना कर दूं तो मुझे बुरा कहना नहीं।
हम मेहनत करके अपनी जरूरतें पूरी करते हैं,
तुम हर बार दूसरों की जेब पर क्यों नजर रखते हो।
मेरी कमाई पर तेरा कोई अधिकार नहीं,
मना कर दिया तो इसका मतलब दुश्मनी नहीं।
तेरे हर बहाने का अब जवाब तैयार है,
भाई, मेरे पास तेरे लिए उधार से इनकार है।
जब भी मिलते हो, पैसों की बात करते हो,
कभी बिना मतलब भी दोस्ती निभाया करो।
हम किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते,
और अपनी कमाई हर किसी पर नहीं लुटाते।
मुझे कंजूस कहने से पैसे नहीं मिल जाएंगे,
तेरे झूठे बहाने अब काम नहीं आएंगे।
मेरी शराफत को कमजोरी समझना छोड़ दे,
दोस्ती के नाम पर मेरी जेब टटोलना छोड़ दे।
ना मैं तेरा बैंक हूं, ना कोई खजाना,
हर बार उधार के लिए मेरे पास मत आना।
जितना वक्त तू बहाने बनाने में लगाता है,
उतनी मेहनत करे तो खुद कमाकर खाता है।
मेरा इनकार सुनकर मुंह मत फुलाया कर,
अपनी जरूरतों का बोझ मुझ पर मत डाला कर।
उधार मांगते वक्त बड़े अपने बन जाते हो,
वापस देने की बात पर रास्ता बदल जाते हो।
तेरी मजबूरी समझी, इसलिए पैसे दिए थे,
तूने तो हर बार नए बहाने तैयार किए थे।
अपनी जरूरतों का हिसाब खुद रखा कर,
दूसरों की कमाई पर भरोसा कम किया कर।
हम दिल से रिश्ते निभाते हैं, पैसों से नहीं,
जो सिर्फ उधार के लिए आए, वो अपने नहीं।
अब ना तेरी बातों में आएंगे, ना बहाने सुनेंगे,
पहले पुराना पैसा लौटाओ, फिर आगे सोचेंगे।
करारा जवाब सुनना है तो कान खोलकर सुन ले,
दोस्ती चाहिए तो रख, उधार का रास्ता भूल जा।
दो लाइन उधार मांगने वालों पर शायरी

मेरी जेब को एटीएम समझने वालों, थोड़ा होश में आओ,
हर बार उधार मांगने से अच्छा खुद कमाकर खाओ।
जब भी तेरा मैसेज आता है, दिल घबराता है,
हालचाल से पहले ही उधार का सवाल आता है।
दोस्ती अपनी जगह है, पैसों का हिसाब अपनी जगह,
हर बार उधार मांगना नहीं है दोस्ती निभाने की वजह।
महीने की पहली तारीख तुझे बड़ी प्यारी लगती है,
मेरी सैलरी आते ही तेरी मजबूरी जागती है।
उधार मांगने में तुम्हारी रफ्तार कमाल है,
लौटाने की बारी आए तो नेटवर्क बेहाल है।
ना मैं बैंक हूं, ना नोट छापने की मशीन,
हर बार पैसे मांगकर मत छीन मेरा चैन।
तेरे बहाने सुनकर अब हंसी आने लगी है,
तेरी हर मजबूरी पुरानी फिल्म लगने लगी है।
पैसे मांगते वक्त रिश्ते याद दिलाते हो,
वापस मांगने पर हमें ही गलत बताते हो।
मेहनत मेरी और खर्चे तुम्हारे क्यों हों,
मेरे कमाए नोट तुम्हारे सहारे क्यों हों।
जिस दिन उधार देना मैंने बंद कर दिया,
उसी दिन तूने दोस्ती का रिश्ता खत्म कर दिया।
हर मुलाकात में उधार का जिक्र मत किया कर,
कभी दोस्त बनकर भी मेरा हाल पूछ लिया कर।
पांच सौ मांगकर हजार के सपने दिखाते हो,
लौटाने की तारीख पर नए बहाने बनाते हो।
तेरी जरूरतों का कोई आखिरी पड़ाव नहीं,
मेरी जेब में भी पैसों का कोई पेड़ नहीं।
उधार मांगना तेरी आदत बन चुकी है,
और मना करना अब मेरी जरूरत बन चुकी है।
जब पैसे चाहिए तो भाई-भाई कहते हो,
लौटाने की बारी आए तो चुपचाप रहते हो।
बड़ी मुश्किल से अपनी कमाई बचाता हूं,
तेरा फोन आते ही मोबाइल साइलेंट कर जाता हूं।
तेरी मीठी बातों में अब हम नहीं आएंगे,
पुराना हिसाब साफ करो, तभी नया उधार देंगे।
उधार के नाम पर हर बार कहानी मत सुनाया कर,
अपनी शॉपिंग के खर्चों को मजबूरी मत बताया कर।
मेरी जेब खाली है, ये बात समझ लिया कर,
हर महीने मुझसे उधार की उम्मीद मत किया कर।
अब दोस्ती निभाएंगे मगर हिसाब भी रखेंगे,
जो पैसे लेकर भूल जाते हैं, उनसे दूरी रखेंगे।
उधार मांगने वालों के मजेदार बहाने

बस दो दिन के लिए पैसे चाहिए यार,
ये दो दिन सुनते-सुनते बीत गए कई त्योहार।
भाई, कल सैलरी आने वाली है,
ये बात पिछले छह महीने से सुनने वाली है।
अभी पर्स घर पर भूल आया हूं,
इसलिए तेरे पास उधार मांगने आया हूं।
भाई, मेरा गूगल पे काम नहीं कर रहा,
लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग का बिल बराबर भर रहा।
बस आखिरी बार मदद कर दे भाई,
ये आखिरी बार वाली बात सौ बार सुनाई।
अगले सोमवार पक्का लौटा दूंगा यार,
पर कौन सा सोमवार, ये है सबसे बड़ा सवाल।
भाई, बैंक का सर्वर डाउन चल रहा है,
और तेरा उधार मांगने का सर्वर फुल चल रहा है।
आज पैसे दे दे, कल डबल लौटाऊंगा,
कल आते ही नया बहाना सुनाऊंगा।
भाई, घर में थोड़ी परेशानी चल रही है,
पर इंस्टाग्राम पर गोवा की फोटो चमक रही है।
मेरे पैसे किसी दोस्त के पास फंसे हैं,
भाई, तेरे बहाने भी बड़े जबरदस्त हैं।
बस पांच सौ रुपये की छोटी सी बात है,
मगर मांगने का सिलसिला हर दिन और हर रात है।
भाई, इस महीने खर्चे ज्यादा हो गए,
लगता है तेरे सारे बजट मेरे भरोसे हो गए।
तेरा पैसा बिल्कुल सुरक्षित है मेरे पास,
बस वापस कब मिलेगा, मत रखना कोई आस।
भाई, अभी जेब में कैश नहीं है,
मगर नई बाइक लेने में कोई परेशानी नहीं है।
अभी थोड़ा टाइट चल रहा हूं भाई,
ये बात सुनकर मेरी भी जेब घबराई।
कल पापा पैसे भेजने वाले हैं,
भाई, तेरे पापा भी शायद रास्ता भूलने वाले हैं।
तेरा पैसा देना मुझे अच्छी तरह याद है,
लेकिन हर बार भूल जाना भी तेरी खास बात है।
बस इस महीने संभाल ले मेरे भाई,
अगले महीने फिर यही फरियाद है दोहराई।
भाई, मेरा अकाउंट अभी फ्रीज हुआ है,
पर पार्टी का खर्चा पूरा रिलीज हुआ है।
पैसे लौटा दूंगा, तू टेंशन मत लेना,
बस अगली बार उधार मांगूं तो मना मत करना।
Conclusion
उधार मांगने वाले दोस्त और रिश्तेदार हर किसी की जिंदगी में मिल ही जाते हैं। कुछ जरूरत पड़ने पर पैसे मांगते हैं, तो कुछ उधार लेकर वापस करना ही भूल जाते हैं। ऐसे लोगों को हर बार सीधे जवाब देना आसान नहीं होता। इसलिए हमारी Udhar Paise Mangne Wale Shayari के जरिए आप अपनी बात मजेदार और तंज भरे अंदाज में कह सकते हैं। उम्मीद है आपको ये शायरियां पसंद आई होंगी। अपनी पसंदीदा शायरी WhatsApp Status पर लगाएं और उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो आपको चलता-फिरता ATM समझते हैं!
FAQs
उधार मांगने वालों के लिए सबसे अच्छी शायरी कौन सी है?
उधार मांगने वालों के लिए मजेदार शायरी है:
“जब जरूरत पड़ी तो भाई-भाई कहते हो,
पैसे लौटाने की बात पर चुप रहते हो।
उधार मांगने में सबसे आगे रहते हो,
वापस करने के नाम पर गायब रहते हो।”
बार-बार पैसे मांगने वाले दोस्त को शायरी में क्या जवाब दें?
अगर आपका दोस्त बार-बार पैसे मांगता है, तो उसे मजाक में कह सकते हैं:
“दोस्ती अपनी जगह है यार,
पर हर बार मत मांग उधार।
दिल से दोस्ती निभाएंगे,
लेकिन ATM नहीं बन पाएंगे।”
उधार लेकर पैसे वापस न देने वालों के लिए क्या लिखें?
ऐसे लोगों के लिए आप लिख सकते हैं, “पैसे लेते वक्त बड़े वादे करते हो, वापस मांगो तो नए बहाने करते हो।” यह शायरी उन लोगों पर फिट बैठती है जो उधार लेकर लौटाना भूल जाते हैं।
उधार मांगने वालों पर मजेदार दो लाइन शायरी कौन सी है?
“सैलरी आते ही तुम्हारा प्यार जाग जाता है,
भाई, थोड़ा उधार दे दे वाला मैसेज आ जाता है।”
यह शायरी उन दोस्तों के लिए है जो सिर्फ पैसों की जरूरत पड़ने पर याद करते हैं।
पैसे मांगने वालों को बिना नाराज किए कैसे मना करें?
अगर कोई दोस्त या रिश्तेदार बार-बार उधार मांगता है, तो आप प्यार से कह सकते हैं, “भाई, इस महीने मेरा भी बजट टाइट है।” मजाक में यह भी कह सकते हैं, “दिल बड़ा है भाई, लेकिन बैंक बैलेंस छोटा है।” इससे आपकी बात भी साफ हो जाएगी और सामने वाले को बुरा भी कम लगेगा।
उधार मांगने वालों के लिए WhatsApp Status पर क्या लगाएं?
आप WhatsApp Status पर यह मजेदार शायरी लगा सकते हैं:
“हालचाल पूछने का जमाना गया,
अब हर दोस्त उधार मांगने आ गया।”
यह छोटा और मजेदार स्टेटस उन दोस्तों पर तंज कसने के लिए अच्छा है जो सिर्फ पैसे मांगने के लिए मैसेज करते हैं।